मत्ती 7:21–23 का अर्थ: “मैं ने तुम को कभी नहीं जाना”
यीशु ने कहा “मैं ने तुम को कभी नहीं जाना” — पर किनसे? मत्ती 7:21–23 आधा नहीं, पूरा पढ़िए, और देखिए कि यह डर परमेश्वर की तरफ़ से नहीं आता।
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मेरे प्रियों, आज मैं आपसे एक ऐसे डर के बारे में बात करना चाहता हूँ जिससे बहुत से विश्वासी डरते हैं। और वह डर परमेश्वर की तरफ़ से नहीं है — शत्रु की तरफ़ से है।
- “कहीं कल के दिन यीशु मेरा इनकार न कर दें?”
- “इतनी सेवा की, इतनी प्रार्थना की — फिर भी क्या मैं उन्हीं लोगों में गिना जाऊँगा?”
- “मत्ती 7 का वह वचन कहीं मेरे बारे में तो नहीं है?”
यह डर एक वचन से निकाला जाता है, इसलिए इसका जवाब भी वचन से ही आएगा। तो पहले वह वचन पूरा पढ़िए।
“जो मुझ से, ‘हे प्रभु! हे प्रभु!’ कहता है, उनमें से हर एक स्वर्ग के राज्य में प्रवेश न करेगा, परन्तु वही जो मेरे स्वर्गीय पिता की इच्छा पर चलता है। उस दिन बहुत से लोग मुझ से कहेंगे, ‘हे प्रभु, हे प्रभु, क्या हम ने तेरे नाम से भविष्यद्वाणी नहीं की, और तेरे नाम से दुष्टात्माओं को नहीं निकाला, और तेरे नाम से बहुत से आश्चर्यकर्म नहीं किए?’ तब मैं उनसे खुलकर कह दूँगा, ‘मैं ने तुम को कभी नहीं जाना। हे कुकर्म करनेवालो, मेरे पास से चले जाओ।’यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि यीशु मसीह कह रहे हैं — वे लोग पिता की इच्छा पर नहीं चलते। अब ऐसा हो ही नहीं सकता कि यीशु मसीह यह न बताएँ कि पिता की इच्छा क्या है। आगे देखते हैं।
1. परमेश्वर का वचन तलवार है
सिर्फ़ एक वचन से ही आप दूसरे वचन को समझ सकते हैं। शैतान भी यीशु मसीह के पास वचन लेकर आया था, पर यीशु मसीह ने शैतान को दूसरे वचन से हरा दिया। और उससे कहा, “यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो अपने आप को नीचे गिरा दे; क्योंकि लिखा है: ‘वह तेरे विषय में अपने स्वर्गदूतों को आज्ञा देगा, और वे तुझे हाथों-हाथ उठा लेंगे; कहीं ऐसा न हो कि तेरे पाँवों में पत्थर से ठेस लगे।’ ” यीशु ने उससे कहा, “यह भी लिखा है: ‘तू प्रभु अपने परमेश्वर की परीक्षा न कर।’ ”मत्ती 4:6-7 · HIOV हिंदीबाइबल में पढ़िए
क्योंकि जो वचन शैतान यीशु के पास लेकर आया था, वे नाश करने के लिए थे। आज भी शैतान लोगों का जीवन नाश करने के लिए वचन लेकर आता है — “तुमने अपना उद्धार खो दिया”, “तुम सही जीवन नहीं जी रहे हो”, “परमेश्वर तुमसे ख़ुश नहीं है”, “देखो, वचन में लिखा है कि वे लोग परमेश्वर की इच्छा पर नहीं चलते”। शैतान का यही काम है — बाइबल में उसे दोष लगानेवाला कहा गया है। फिर मैं ने स्वर्ग से यह बड़ा शब्द आते हुए सुना, “अब हमारे परमेश्वर का उद्धार और सामर्थ्य और राज्य और उसके मसीह का अधिकार प्रगट हुआ है, क्योंकि हमारे भाइयों पर दोष लगानेवाला, जो रात दिन हमारे परमेश्वर के सामने उन पर दोष लगाया करता था, गिरा दिया गया है।प्रकाशितवाक्य 12:10 · HIOV हिंदीबाइबल में पढ़िए
और मैं इतना निश्चय से क्यों कह रहा हूँ कि यह शैतान बोल रहा है, पवित्र आत्मा नहीं? क्योंकि अगर आप नया जन्म पाए हुए मसीही न होते, अगर आपने उद्धार न पाया होता, तो इस डर को शैतान आपके पास लेकर ही न आता। क्योंकि जिन्होंने उद्धार नहीं पाया, जो दुनिया के लोग हैं, उन्हें कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि यीशु मसीह से वे क्या कहते हैं। शैतान यह डर सिर्फ़ उन्हीं मसीहियों को दे सकता है जिन्होंने उद्धार पाया हो।
2. तो पिता की इच्छा क्या है? यीशु ने अपने वचन में बताई है
क्योंकि मेरे पिता की इच्छा यह है कि जो कोई पुत्र को देखे और उस पर विश्वास करे, वह अनन्त जीवन पाए; और मैं उसे अंतिम दिन फिर जिला उठाऊँगा।”यहाँ लिखा है कि जो पुत्र पर विश्वास करे, वह उद्धार पाएगा, अनन्त जीवन पाएगा। मतलब यहाँ सिर्फ़ विश्वास की बात हो रही है — जो केवल यीशु पर विश्वास करेगा, वही उद्धार पाएगा। इस वचन को समझने के लिए कुछ और वचनों पर चलते हैं।
क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है; और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन् परमेश्वर का दान है, और न कर्मों के कारण, ऐसा न हो कि कोई घमण्ड करे।यहाँ बाइबल कहती है कि तुम्हारा उद्धार अनुग्रह के द्वारा हुआ है, कर्मों के कारण नहीं। मतलब तुम्हारे अच्छे जीवन, तुम्हारे पवित्र जीवन के द्वारा उद्धार नहीं मिला — तुमने सिर्फ़ यीशु के बलिदान से पाया। क्योंकि कोई अपने अच्छे कामों से उद्धार कमा सकता ही नहीं था; बाइबल कहती है कि सब ने पाप किया है और सब परमेश्वर की महिमा से रहित हैं। इसलिये कि सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं,रोमियों 3:23 · HIOV हिंदीबाइबल में पढ़िए
इसीलिए अनुग्रह के द्वारा ही सब बच गए। और मैं यहाँ यह नहीं कह रहा कि पवित्र जीवन नहीं जीना। वह हमारा स्वभाव है, क्योंकि यीशु की धार्मिकता हमें दी गई है। जो पाप से अज्ञात था, उसी को उसने हमारे लिये पाप ठहराया कि हम उसमें होकर परमेश्वर की धार्मिकता बन जाएँ।2 कुरिन्थियों 5:21 · HIOV हिंदीबाइबल में पढ़िए
वही धार्मिकता हमें पवित्र जीवन की तरफ़ ले जाती है, और अच्छा जीवन जीना हमें है। पर इसका यह मतलब नहीं कि शैतान का दिया हुआ डर हम परमेश्वर की तरफ़ से समझकर स्वीकार कर लें — क्योंकि हम उसकी चालों से अनजान नहीं हैं। कि शैतान का हम पर दाँव न चले, क्योंकि हम उसकी युक्तियों से अनजान नहीं।2 कुरिन्थियों 2:11 · HIOV हिंदीबाइबल में पढ़िए
3. यीशु का अपना वादा
मैं तुझे कभी न छोड़ूँगा, और न कभी तुझे त्यागूँगा।यीशु खुद बोल रहे हैं कि वे आपको न छोड़ेंगे, न त्यागेंगे। और परमेश्वर वचन देकर भूल नहीं सकते, मना नहीं कर सकते — यह परमेश्वर के स्वभाव के ही ख़िलाफ़ है। बाइबल कहती है:
ईश्वर मनुष्य नहीं कि झूठ बोले, और न वह आदमी है कि अपनी इच्छा बदले। क्या जो कुछ उसने कहा उसे न करे? क्या वह वचन देकर उसे पूरा न करे?तो अंत में, वे कौन लोग हैं जिनका यीशु मसीह इनकार करेंगे
वे लोग जिन्होंने उद्धार पाया ही नहीं। जो यीशु को भी मानते हैं और साथ में दूसरे देवताओं को भी। उनका यीशु मसीह के साथ कोई निजी सम्बन्ध नहीं है — क्योंकि यीशु उन्हें साफ़ बोल रहे हैं, मैं ने तुम को कभी नहीं जाना।
और यह वाक्य ध्यान से पढ़िए। उन्होंने यह नहीं कहा कि मैं तुम्हें जानता था और अब भूल गया, या तुम मेरे थे और छूट गए। “कभी नहीं जाना” — यानी वह सम्बन्ध कभी शुरू ही नहीं हुआ था। इसीलिए यह वाक्य उस पर लागू ही नहीं होता जिसे वे जानते हैं।